E Attandance Controversy : मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग इन दिनों ‘क्वालिटी एजुकेशन’ के नाम पर नित नए फरमान जारी कर रहा है। हाल ही में संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग, ग्वालियर द्वारा 12 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी किया गया है। इसमें स्पष्ट शब्दों में धमकी दी गई है कि सभी शिक्षक विद्यालय में अनिवार्य रूप से सुबह 10:15 बजे के पूर्व उपस्थित होकर ‘हमारे शिक्षक’ ऐप पर अपनी ई-अटेंडेंस (e-attendance) दर्ज करें। ऐसा न करने पर वेतन काटने की कार्यवाही की जाएगी।
दिखने में यह आदेश शिक्षा व्यवस्था को सुधारने वाला लगता है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है? जमीनी स्तर पर यह शिक्षा विभाग के अधिकारियों के दोहरे रवैये (Double Standard) और एक बेहद असुरक्षित ऐप को जबरन थोपने की तानाशाही का जीता-जागता प्रमाण है।
1. ‘हमारे शिक्षक’ ऐप की हकीकत: सरकारी ऐप या सुरक्षा के साथ खिलवाड़?
अधिकारियों का पूरा जोर जिस ‘हमारे शिक्षक’ ऐप पर है, यदि उसकी तकनीकी पृष्ठभूमि (Technical Background) की जांच की जाए, तो कई चौंकाने वाले और गंभीर तथ्य सामने आते हैं:
- निजी ईमेल आईडी का उपयोग: Google Play Store पर इस ऐप के डेवलपर का नाम ‘RAJEEV GANDHI SIKSHA MISSION’ दिया गया है, लेकिन संपर्क के लिए दी गई ईमेल आईडी
vaibhavrsk@gmail.comहै। यह समझ से परे है कि राज्य सरकार के एक आधिकारिक और संवेदनशील ऐप के लिए किसीnic.inयाgov.inडोमेन के बजाय एक साधारण, व्यक्तिगत जीमेल आईडी का उपयोग कैसे किया जा सकता है? - थर्ड-पार्टी ‘रैपर’ ऐप (Wrapper App): प्ले स्टोर के यूआरएल (https://play.google.com/store/apps/details?id=co.median.android.jrejze&hl=en_IN) और पैकेज आईडी
co.median.android.jrejzeसे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई नेटिव (Native) और सुरक्षित सरकारी ऐप नहीं है। इसे median.co नामक एक थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म का उपयोग करके केवल एक वेब रैपर (Web Wrapper) के रूप में बनाया गया है। - डेटा सुरक्षा और विदेशी सर्वर का खतरा: Median.co जैसी कंपनियों में दुनिया भर के (जिनमें पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और चीनी मूल के इंजीनियर भी शामिल हो सकते हैं) डेवलपर्स काम करते हैं। ऐसे थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म पर राज्य के लाखों शिक्षकों का लोकेशन डेटा, फेशियल रिकग्निशन डेटा और व्यक्तिगत जानकारी साझा करना राष्ट्रीय सुरक्षा और निजता (Privacy) का घोर उल्लंघन है।
सवाल यह उठता है कि जिस ऐप की सुरक्षा ऑडिट संदिग्ध है और जिसे किसी निजी प्लेटफॉर्म के जरिए सस्ते में तैयार किया गया है, उसे शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षकों पर जबरन (forcefully) कैसे लागू कर सकते हैं?
2. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात, लेकिन शिक्षकों पर क्लर्क का काम क्यों?
अधिकारी चाहते हैं कि शिक्षक ठीक 10:30 बजे से सिर्फ शिक्षण कार्य करें। यह सैद्धांतिक रूप से बहुत अच्छी बात है, लेकिन हकीकत में आज एक शिक्षक सिर्फ पढ़ा नहीं रहा है, वह विभाग का डाटा एंट्री ऑपरेटर और क्लर्क भी बना हुआ है।
अगर विभाग गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर इतना ही गंभीर है, तो शिक्षकों से ये तमाम गैर-शैक्षणिक (Non-academic) कार्य क्यों कराए जा रहे हैं?
- छात्रवृत्ति (Scholarship) के फॉर्म भरना और उनकी मैपिंग करना।
- छात्रों का प्रवेश (Admission) सुनिश्चित करना और APAAR ID जनरेट करना।
- MP Board के एनरोलमेंट (Enrollment) और परीक्षा फॉर्म भरना।
- UDISE+ की जटिल और लंबी एंट्रियां करना।
यह सभी कार्य पूरी तरह से लिपिकीय (Clerical) प्रकृति के हैं। यदि कार्यालयों में बैठे अधिकारी इतने ही मुस्तैद हैं, तो यह सारा क्लर्कियल काम ऑफिस के स्टाफ द्वारा क्यों नहीं किया जाता? जब तक शिक्षक इन कागजी और ऑनलाइन पोर्टल के मकड़जाल में उलझा रहेगा, तब तक ‘क्वालिटी एजुकेशन’ सुनिश्चित करना असंभव है।
3. अधिकारियों का दोहरा रवैया: खुद के कार्यों पर ई-समीक्षा क्यों नहीं?
शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षकों के वेतन काटने के आदेश तो रातों-रात निकाल देते हैं, लेकिन अपने ही कार्यालयों (BEO, DEO, JD ऑफिस) में व्याप्त लेटलतीफी और अव्यवस्था पर इनकी कोई जवाबदेही नहीं है:
- शिक्षकों की सर्विस बुक (Service Book) का अपडेशन सालों-साल नहीं होता।
- क्रमोन्नति, समयमान वेतनमान और अन्य सुविधाओं की फाइलें दफ्तरों में धूल खाती रहती हैं।
- एरियर और अन्य दावों को पास कराने के लिए शिक्षकों को कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
क्या किसी उच्च अधिकारी ने कभी ऐसा आदेश निकाला है कि यदि कोई क्लर्क या अधिकारी तय समय सीमा में सर्विस बुक अपडेट नहीं करेगा या पेंडिंग काम नहीं निपटाएगा, तो उसका वेतन काटा जाएगा? खुद के दफ्तर का काम समय पर न करने वाले अधिकारी, शिक्षकों को 15 मिनट की देरी पर वेतन काटने की धमकी देते हैं—यही विभागीय अधिकारियों का सबसे बड़ा दोगलापन है।
Analyze this instruction:
| आज दिनांक 10-08-26 को लोकशिक्षण संचालनालय द्वारा आयोजित विडियो कांफ्रेस श्रीमान आयुक्त महोदय द्वारा निम्नानुसार निर्देश दिए गए – 1. GER सर्वे अंतर्गत ड्राप आउट बच्चो की सूची हमारे शिक्षक एप्प पर सभी शिक्षको के लॉग इन पर उपलब्ध कराई गई है , अगले तीन दिन में सूची में उपलब्ध कराये गए बच्चो एवं पालको से सम्बंधित शिक्षक द्वारा आवश्यक रूप से संपर्क कर उसका शाला में प्रवेश सुनिश्चित कराना है , यदि वह प्रवेशित है तो शाला जिसमे प्रवेशित है की जानकारी तथा प्रवेशित नहीं होने की स्थिति में प्रवेशित नहीं होने का कारण उल्लेखित करना है | 2. सभी लोक सेवको को प्रातः 09:45 बजे तक शाला में उपस्थित होकर 10:00 बजे के पूर्व अपनी उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करना है, 10:00 बजे के बाद उपस्थिति लगाने वाले लोक सेवको की पृथक से समीक्षा की जायेगी | 3. कक्षा 9 से 12 के सभी बच्चो की उपस्थिति हमारे शिक्षक एप्प के माध्यम से लगाई जाने के निर्देश जारी किये गए है, अतः निर्देशानुसार आवश्यक रूप से प्रतिदिन उपस्थिति लगाना सभी शाला प्राचार्य सुनिश्चित करेंगे, लम्बे समय से अनुपस्थित रहने वाले बच्चो से व्यक्तिगत संपर्क कर अनुपस्थिति का कारण चिन्हित करेंगे, इसकी ज़िला स्तर पर शालावार समीक्षा की जायेगी | 4. अभी तक बच्चो के नामांकन सम्बंधित पोर्टल प्रविष्ठिया जिन शालाओ में नहीं की गई है तत्काल 2 दिवस में पूर्ण करावे । 5. एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर यदि दिवंगत, स्थानातरित अथवा सेवानिवृत्त लोक सेवको के नाम हटाने सम्बंधित कार्यवाही नहीं की गई है, इसे तत्काल सुधारा जाये एवं पोर्टल की सभी प्रविष्टियो को अपडेट रखे | 6. हाई स्कूल / उमावि. के किसी शिक्षक की जनगणना कार्य में ड्यूटी लगी है उसकी जानकारी तत्काल ज़िला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजे | 7. लम्बे समय तक अनुपस्थित लोक सेवक की जानकारी तथा उसके सम्बन्ध में पुरे प्रकरण की संक्षेपिका एवं शाला / संकुल स्तर से की गई सम्पूर्ण कार्यवाही विवरण के साथ ज़िला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को तत्काल भेंजे | 8. जिन शालाओ में छात्रवृत्ति खाता अपडेशन का कार्य लंबित है उन बच्चो का त्रुटी पूर्ण खाते के स्थान पर नवीन खाता अपडेट करने की कार्यवाही की जावे | 9. पौधारोपण हेतु आगामी हरियाली अमावस्या त्यौहार , स्वतंत्रता दिवस एवं शुक्रवार को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान अंतर्गत प्रत्येक शाला में विशेष आयोजन किया जाना है जिसमे, प्राथमिक विद्यालय में 10, माध्यमिक विद्यालय में 15 हाई स्कूल में 20 एवं उमावि. में न्यूनतम 35 पोधारोपण का लक्ष्य एक पेड़ माँ के नाम अभियान अंतर्गत एक सप्ताह के लिए निर्धारित किया गया है जिसको पूर्ण कर रोपित पौधों की प्रविष्टि Mission LiFE पोर्टल/निर्धारित पर भी अनिवार्यतः करना सुनिश्चित करें । 10.. जिन शालाओ में अतिरिक्त फर्नीचर रखा है उनमे से उपयोग योग्य, मरम्मत योग्य एवं बेकार जिसकी मरम्मत नहीं हो सकती की छटनी करे, एवं इसकी जानकारी ज़िला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेंजे ताकि इसे अन्य आवश्यकता वाली शालाओ में भेजने के सम्बन्ध में निर्णय लिया जा सके| 11. विकासखण्ड एवं संकुल स्तर पर लंबित CM हेल्पलाइन को तत्काल समाधान पूर्वक बंद कराने की कार्यवाही की जाए | शाला में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण हेतु शैक्षणिक कैलेण्डर अनुसार टाइम टेबल बनाकर तदनुसार निर्धारित इकाइयों का अध्यापन एवं निर्धारित मासिक टेस्ट की 12. कार्यवाही की मोनिटरिंग शाला / संकुल प्राचार्य एवं BEO स्तर से की जावे, ताकि आगामी वार्षिक परीक्षा में 90 – 95 प्रतिशत परिणाम का लक्ष्य अर्जित किया जा सके | उक्त समस्त बिन्दुओ का सक्षम स्तर पर क्रियान्वयन किया जाना सुनिश्चित करें| |
| दिनांक 10-08-2026 को लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में श्रीमान आयुक्त महोदय द्वारा दिए गए 12 बिंदुओं के निर्देशों का विश्लेषण नीचे दिया गया है। इन निर्देशों को उनकी प्रकृति के अनुसार शैक्षणिक (Academic) और लिपिकीय/प्रशासनिक (Clerical/Administrative) कार्यों में वर्गीकृत किया गया है। निर्देशों का वर्गीकरण (Classification of Instructions) 1. विशुद्ध रूप से शैक्षणिक कार्य (Academic Tasks) इन 12 बिंदुओं में से केवल एक बिंदु सीधे तौर पर कक्षा के भीतर पठन-पाठन, मूल्यांकन और परीक्षा परिणामों से संबंधित है: बिंदु 12: शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार टाइम टेबल बनाकर अध्यापन करना, निर्धारित मासिक टेस्ट लेना और आगामी वार्षिक परीक्षा में 90-95 प्रतिशत परिणाम का लक्ष्य अर्जित करना। 2. लिपिकीय, पोर्टल और प्रशासनिक कार्य (Clerical, Portal & Official Tasks) शेष सभी 11 बिंदु कार्यालयीन स्टाफ, डाटा एंट्री, पोर्टल अपडेशन और गैर-शैक्षणिक प्रबंधन से संबंधित हैं: बिंदु 1: GER सर्वे के तहत ड्रॉप आउट बच्चों की सूची ‘हमारे शिक्षक’ ऐप पर देखना, संपर्क करना और पोर्टल पर कारण दर्ज करना (सर्वे और डाटा एंट्री)। बिंदु 2: प्रातः 09:45 बजे उपस्थित होकर 10:00 बजे से पूर्व ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना (प्रशासनिक अनुशासन)। बिंदु 3: ‘हमारे शिक्षक’ ऐप पर कक्षा 9 से 12 के बच्चों की उपस्थिति लगाना और अनुपस्थित बच्चों की ट्रैकिंग (पोर्टल/ऐप एंट्री)। बिंदु 4: बच्चों के नामांकन से संबंधित एजुकेशन पोर्टल प्रविष्टियां पूर्ण करना (क्लर्कियल/डाटा एंट्री)। बिंदु 5: एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर दिवंगत, स्थानांतरित या सेवानिवृत्त लोक सेवकों के नाम हटाना और अपडेट करना (एचआर/क्लर्कियल कार्य)। बिंदु 6: जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजना (प्रशासनिक रिपोर्टिंग)। बिंदु 7: लंबे समय से अनुपस्थित शिक्षकों का प्रकरण और सम्पूर्ण कार्यवाही का विवरण जिला शिक्षा अधिकारी को भेजना (विभागीय कार्यवाही/रिपोर्टिंग)। बिंदु 8: बच्चों के छात्रवृत्ति खातों का अपडेशन और त्रुटिपूर्ण खातों में सुधार (विशुद्ध क्लर्कियल/वित्तीय कार्य)। बिंदु 9: पौधारोपण के निर्धारित लक्ष्य (10 से 35 पौधे) पूरे करना और ‘Mission LiFE’ पोर्टल पर उसकी प्रविष्टि अनिवार्यतः करना (गैर-शैक्षणिक आयोजन और पोर्टल एंट्री)। बिंदु 10: अतिरिक्त और अनुपयोगी फर्नीचर की छंटनी कर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को जानकारी भेजना (इन्वेंट्री प्रबंधन/क्लर्कियल)। बिंदु 11: CM हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों को समाधान पूर्वक बंद कराना (प्रशासनिक/शिकायत निवारण)। प्रतिशत विश्लेषण (Percentage Analysis) निष्कर्ष उपलब्ध कराए गए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के निर्देशों के स्पष्ट विश्लेषण से यह प्रमाणित होता है कि विभाग द्वारा दिए गए 91.67% निर्देश पूरी तरह से लिपिकीय (Clerical), डाटा एंट्री, सर्वे और पोर्टल अपडेशन से जुड़े हैं। मात्र 8.33% (केवल एक निर्देश) हिस्सा ही वास्तविक रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, टाइम टेबल और परीक्षा परिणामों से संबंधित है। |

निष्कर्ष
जैसा कि इस लेख में सटीक रूप से बताया गया है, बिना उचित बुनियादी ढांचे के आनन-फानन में बनाई गई घटिया तकनीकें थोपना भारतीय शिक्षा प्रणाली के पतन का एक बड़ा कारण बन रहा है।
ग्वालियर संभाग का यह आदेश महज एक उदाहरण है कि नीतियां कितनी एकतरफा हैं। एक असुरक्षित, थर्ड-पार्टी (median.co) द्वारा निर्मित ऐप, जिसमें व्यक्तिगत जीमेल (vaibhavrsk@gmail.com) का इस्तेमाल हुआ है, उसे जबरन थोपना तानाशाही है। यदि विभाग सच में शिक्षा में सुधार चाहता है, तो उसे अपना दोहरा रवैया छोड़ना होगा, डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और गैर-शैक्षणिक काम क्लर्कों को सौंपने होंगे।