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- Meta Description: मध्य प्रदेश के 4.5 लाख सरकारी कर्मचारियों का 10 साल का इंतजार खत्म! जानें MP लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 का नया फॉर्मूला, 2029 तक की सीनियरिटी लिस्ट और 2 लाख नई भर्तियों पर इसका सीधा असर।
MP Govt Employees Promotion 2026
MP Govt Employees Promotion 2026 : मध्य प्रदेश के लगभग 4.50 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले एक दशक (मई 2016) से अटकी हुई पदोन्नति (Promotion) प्रक्रिया अब फिर से पटरी पर लौटने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने इस दिशा में अपने कदम तेजी से बढ़ा दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) से लेकर मुख्य सचिव (Chief Secretary) स्तर तक बैठकों का दौर जारी है।
कैबिनेट से ‘मध्य प्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025’ को हरी झंडी मिलने के बाद, अब विभागों को 2029 तक की सीनियरिटी लिस्ट (Seniority List) तैयार करने के सख्त निर्देश दे दिए गए हैं। इस ऐतिहासिक फैसले का असर केवल वर्तमान कर्मचारियों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि प्रमोशन के बाद खाली होने वाले निचले स्तर के लगभग 2 लाख पदों से प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए सरकारी नौकरी (Govt Jobs) के नए द्वार भी खुलेंगे।
इस विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में हम समझेंगे कि सरकार की नई रणनीति क्या है, प्रमोशन का नया फॉर्मूला (New Promotion Formula) कैसे काम करेगा, किन विभागों में सबसे ज्यादा संकट है, और इस फैसले का कानूनी व सामाजिक पहलू क्या है।
📌 लेख की मुख्य बातें (Key Highlights)
- 10 वर्ष का सूखा खत्म: मई 2016 से रुकी हुई प्रमोशन प्रक्रिया अगले 10 से 15 दिनों में शुरू होने की संभावना।
- कैबिनेट की मंजूरी: 17 जून को ‘मध्य प्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025’ को कैबिनेट की स्वीकृति।
- CS के सख्त निर्देश: मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा 24 जून को सभी विभागों को तुरंत प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश।
- सीनियरिटी लिस्ट 2029: GAD ने 20 विभागों से 2029 तक की वरिष्ठता सूची (Seniority List) तैयार करने को कहा।
- रोजगार के नए अवसर: प्रमोशन से निचले स्तर के लगभग 2 लाख पद रिक्त होंगे, जिन पर नई भर्तियां होंगी।
- नया फॉर्मूला: ACR (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) के आधार पर तय होगा प्रमोशन, क्लास-1 के लिए मेरिट और सीनियरिटी दोनों जरूरी।
1. प्रमोशन प्रक्रिया का ऐतिहासिक संदर्भ: 10 साल का लंबा इंतजार
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति पर मई 2016 से अघोषित रोक लगी हुई थी। यह रोक आरक्षण और पदोन्नति नियमों को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चल रही कानूनी उलझनों के कारण लगी थी।
इस एक दशक के लंबे अंतराल में राज्य के प्रशासन और कर्मचारियों पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा। पिछले 10 वर्षों में लाखों सरकारी सेवक बिना किसी पदोन्नति का सुख भोगे ही उसी पद से सेवानिवृत्त (Retired) हो गए, जिस पद पर वे सालों से कार्यरत थे। मई 2026 तक आते-आते, बिना प्रमोशन रिटायर होने वाले कर्मचारियों का आंकड़ा चिंताजनक रूप से बढ़ चुका है। बिना प्रमोशन के रिटायर होने का सीधा अर्थ है—आर्थिक नुकसान, कम पेंशन, और जीवन भर की सेवा के बाद सम्मानजनक पद न मिल पाने की मानसिक पीड़ा।
लेकिन अब, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल के बाद प्रशासनिक विभागों में कार्रवाई तेज हो गई है। सरकार ने दिल्ली और जबलपुर के वरिष्ठ वकीलों से कानूनी राय लेकर पदोन्नति के रास्ते में आ रही सभी बाधाओं को दूर करने का एक मजबूत मसौदा तैयार कर लिया है।
2. GAD की तैयारी: 2029 तक की सीनियरिटी लिस्ट का आदेश
पदोन्नति प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department – GAD) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद, राज्य सरकार ने बैकएंड (Backend) पर पूरी तैयारी रखने का फैसला किया है ताकि न्यायालय का फैसला आते ही बिना एक दिन की देरी किए आदेश जारी किए जा सकें।
- 20 विभागों की उच्च स्तरीय बैठक: हाल ही में GAD ने 20 प्रमुख विभागों के उप सचिव (Deputy Secretary) स्तर के अधिकारियों की एक अहम बैठक बुलाई।
- डेटा अपडेशन के निर्देश: इस बैठक में सभी विभागों से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), और अनारक्षित (Unreserved) पदों पर कार्यरत अधिकारियों का पूरा डेटाबेस अपडेट करें।
- नियम-5 का पालन: लोक सेवा प्रमोशन नियम-2025 के ‘नियम-5’ के तहत विभिन्न संवर्गों में पदों का निर्धारण किया जाना है।
- साल में दो बार अपडेशन: नियमों के अनुसार, अब सीनियरिटी लिस्ट को हर साल दो बार—जनवरी और जुलाई—में अपडेट किया जाएगा। विभागों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे वर्तमान स्थिति को देखते हुए सीधे 2029 तक की सीनियरिटी लिस्ट तैयार कर के रखें।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किस अधिकारी की वरिष्ठता किस स्तर पर है, इसका रिकॉर्ड त्रुटीहीन होना चाहिए। मुख्य सचिव अनुराग जैन (CS Anurag Jain) ने भी महाधिवक्ता कार्यालय (Advocate General Office) से मार्गदर्शन लेकर इस प्रक्रिया को तेज करने को कहा है।
3. क्या है प्रमोशन का नया फॉर्मूला? (The New Promotion Formula)
कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए नियमों के तहत पदोन्नति आखिर किस आधार पर दी जाएगी? सरकार ने इसके लिए एक बेहद पारदर्शी और योग्यता-आधारित (Merit-based) फॉर्मूला तैयार किया है।
नीचे दी गई छवि (Image) में दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित नए फॉर्मूले के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है:
A. रिक्त पदों को वर्गों में बांटना (Categorization of Vacant Posts)
- जितने भी पद प्रमोशन के लिए खाली होंगे, उन्हें सबसे पहले SC-ST (16% से 20%) और अनारक्षित (Unreserved) हिस्सों में वैज्ञानिक तरीके से बांटा जाएगा।
- नियमों के तहत, पहले SC-ST वर्ग के आरक्षित पद भरे जाएंगे। इसके बाद बाकी बचे हुए पदों के लिए सभी दावेदारों (विभिन्न वर्गों) को मौका दिया जाएगा।
B. दो तरह से बनेगी लिस्ट (Two-Tier Listing System)
पदों की गरिमा और जिम्मेदारी को देखते हुए सरकार ने अधिकारियों को दो श्रेणियों में बांटा है:
- क्लास-1 अधिकारी (Class-1 Officers): जैसे कि डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त संचालक आदि। इन उच्च पदों के लिए प्रमोशन की लिस्ट केवल वरिष्ठता (Seniority) के आधार पर नहीं बनेगी। इसके लिए मेरिट (Merit) और सीनियरिटी दोनों को आधार बनाया जाएगा। यानी आपका काम भी उत्कृष्ट होना चाहिए।
- क्लास-2 और उससे नीचे के पद (Class-2 & Below): इन पदों के लिए प्रमोशन मुख्य रूप से सीनियरिटी (वरिष्ठता) के आधार पर ही किया जाएगा।
C. ACR (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) का महत्व (Importance of ACR)
नियम-2025 का सबसे कड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा है ACR (Annual Confidential Report)। प्रमोशन पाने के लिए कर्मचारी की गोपनीय रिपोर्ट का बेहतरीन होना अनिवार्य है।
- शर्त 1: पिछले 2 साल की सर्विस में कम से कम 1 रिपोर्ट ‘आउटस्टैंडिंग’ (Outstanding) होनी चाहिए।
- शर्त 2: या फिर, पिछले 7 सालों के सेवाकाल में कम से कम 4 रिपोर्ट ‘A+’ ग्रेड की होनी चाहिए।
- सबसे बड़ा पेंच: यदि किसी कर्मचारी की अपनी लापरवाही या गलती के कारण उसकी ACR नहीं बनी है या जमा नहीं हुई है, तो उसे प्रमोशन का लाभ नहीं दिया जाएगा। यह नियम कर्मचारियों को अपने काम और रिकॉर्ड के प्रति जवाबदेह बनाएगा।
4. ‘प्रभार’ (In-charge) व्यवस्था से जूझते विभाग
प्रमोशन न होने का सबसे भयानक असर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे पर पड़ा है। पिछले 9-10 सालों से कई महत्वपूर्ण विभाग ‘प्रभारी’ अधिकारियों (In-charge officers) के भरोसे चल रहे हैं। जब नियमित प्रमोशन नहीं होते, तो विभाग का काम चलाने के लिए जूनियर अधिकारियों को सीनियर पदों का प्रभार (Charge) सौंप दिया जाता है।
आइए इस स्थिति को नीचे दिए गए इन्फोग्राफिक के माध्यम से समझते हैं:
प्रमुख विभागों का हाल (State of Major Departments):
सबसे ज्यादा असर इंजीनियरिंग और तकनीकी विभागों जैसे—जल संसाधन (Water Resources), पीएचई (PHE – लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी), लोक निर्माण विभाग (PWD), नर्मदा घाटी विकास, और नगरीय विकास विभाग पर पड़ा है।
- PHE विभाग का संकट: इस विभाग में कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer – EE) के 127 स्वीकृत पद हैं। हैरानी की बात यह है कि वर्तमान में नियमित रूप से सिर्फ 15 अधिकारी ही EE के पद पर कार्यरत हैं। बाकी बचे हुए 112 पदों को ‘प्रभार व्यवस्था’ (Charge system) के जरिए जूनियर इंजीनियरों या सहायक यंत्रियों द्वारा संचालित किया जा रहा है।
- ENC जैसे शीर्ष पदों पर संकट: PHE विभाग में मुख्य अभियंता (Engineer-in-Chief / ENC) के 3 स्वीकृत पद हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि 1 ENC पद पर SC वर्ग और 2 ENC पदों पर ST वर्ग के अधिकारी पदस्थ हैं।
- आने वाले समय में रिटायरमेंट के कारण इन शीर्ष पदों पर रिक्तियां और बढ़ेंगी। जल संसाधन और PWD में भी अधीक्षण यंत्रियों (Superintending Engineers) को प्रभारी ENC बनाया गया है।
प्रभार व्यवस्था के नुकसान:
प्रभार को लेकर विभागों में भारी असंतोष रहता है। जूनियर को सीनियर का प्रभार देने से ईगो क्लैश (Ego clash) होता है और विवाद अक्सर हाईकोर्ट तक पहुँच जाते हैं। अधिकारियों की कमी और इन विवादों के कारण विभागीय कामकाज और करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजनाओं (Government Projects) की गति धीमी पड़ जाती है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि प्रमोशन प्रक्रिया शुरू होने से इस प्रशासनिक पंगुता (Administrative paralysis) को दूर किया जा सकेगा।
5. युवाओं के लिए खुशखबरी: 2 लाख नई भर्तियों का रास्ता साफ
इस पूरे घटनाक्रम का एक बहुत ही सकारात्मक और दूरगामी परिणाम सामने आने वाला है, जो सीधे तौर पर राज्य के बेरोजगार युवाओं से जुड़ा है।
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ भोपाल, मध्य प्रदेश के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने इस फैसले के दूसरे पहलू पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि जब ऊपर के पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होगी, तो स्वाभाविक रूप से नीचे के पद खाली हो जाएंगे।
चेन रिएक्शन (Chain Reaction) कैसे काम करेगा?
- एक क्लर्क प्रमोट होकर हेड क्लर्क बनेगा।
- हेड क्लर्क प्रमोट होकर असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) बनेगा।
- ASO प्रमोट होकर सेक्शन ऑफिसर (SO) बनेगा।
इस पूरी प्रक्रिया के अंत में जो सबसे निचला (Entry-level) पद होगा, वह पूरी तरह से रिक्त हो जाएगा। अनुमान के मुताबिक, 4.5 लाख कर्मचारियों के प्रमोशन से विभागवार निचले स्तर पर करीब दो लाख (2,00,000) पद खाली होंगे।
इन 2 लाख रिक्त पदों के बनने से प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए नई सरकारी नौकरियों (New Govt Jobs in MP) और रोजगार के अवसरों का दरवाजा पूरी तरह से खुल जाएगा। राज्य सरकार इन पदों को भरने के लिए ESB (व्यापम) और MPPSC के माध्यम से बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान (Recruitment Drive) चला सकेगी, जिससे मध्य प्रदेश में बेरोजगारी (Unemployment) की समस्या को हल करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।
6. विरोध के स्वर और कानूनी चुनौतियां (Opposition and Legal Challenges)
जहाँ एक ओर लाखों कर्मचारी प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं, वहीं इस नई व्यवस्था (पदोन्नति नियम-2025) का कड़ा विरोध भी शुरू हो गया है।
SPEAK संगठन का विरोध:
सामान्य पिछड़ा वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संगठन (SPEAK) के अध्यक्ष डॉ. केएस तोमर ने सरकार के इस कदम पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- आरोप: डॉ. तोमर का आरोप है कि सरकार 2002 के पुराने प्रमोशन नियमों जैसी ही व्यवस्था को नए आवरण (2025 के नियमों) में लागू कर रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल SC-ST वर्ग को फायदा पहुंचाना है।
- असंतुलन का तर्क: उनका कहना है कि आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पहले ही तय सीमा से अधिक प्रमोशन दिए जा चुके हैं। न्याय का तकाजा यह है कि पहले अनारक्षित (Unreserved/General) वर्ग के वर्षों से लंबित पड़े प्रमोशन किए जाएं, ताकि विभागों में बना यह असंतुलन दूर हो सके।
- कोर्ट जाने की चेतावनी: SPEAK संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे सरकार के इन नए प्रमोशन नियमों और इस पूरी प्रक्रिया को एक बार फिर से हाईकोर्ट (High Court) में चुनौती देंगे।
अधिकारियों में असमंजस (Confusion among officers):
GAD की बैठक में शामिल कई उप सचिव स्तर के अधिकारियों के बीच भी थोड़ी असमंजस की स्थिति है। उनका मानना है कि उन्हें फिलहाल सिर्फ 2029 तक की सीनियरिटी लिस्ट तैयार करने को कहा गया है। चूंकि मुख्य मामला अभी भी जबलपुर हाईकोर्ट में लंबित है और फैसला सुरक्षित रखा गया है, इसलिए अंतिम रूप से प्रमोशन के आदेश तभी जारी हो सकेंगे जब सरकार को विधिक रूप से पूर्ण हरी झंडी मिल जाएगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 10 साल बाद प्रमोशन प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने का प्रयास एक साहसिक और आवश्यक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की सक्रियता यह दर्शाती है कि शासन अब इस मुद्दे को और अधिक टालना नहीं चाहता।
जहाँ ‘मध्य प्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025’ और सख्त ACR फॉर्मूला प्रशासन में मेरिट और गुणवत्ता को वापस लाएंगे, वहीं ‘प्रभार’ के सहारे चल रहे विभागों को स्थायी अधिकारी मिलने से विकास कार्यों में तेजी आएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विभागीय पदोन्नति से उत्पन्न होने वाले 2 लाख रिक्त पद राज्य के युवाओं के लिए एक सुनहरा भविष्य लेकर आएंगे।
हालांकि, SPEAK जैसे संगठनों का विरोध और हाईकोर्ट का सुरक्षित फैसला अभी भी इस प्रक्रिया के मार्ग में अहम पड़ाव हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इन कानूनी और सामाजिक बाधाओं को कैसे पार करती है और कब प्रदेश के 4.5 लाख कर्मचारियों के हाथों में उनके हक़ का ‘प्रमोशन लेटर’ सौंपती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन कब से रुके हुए हैं?
उत्तर: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रमोशन की प्रक्रिया मई 2016 से पूरी तरह रुकी हुई है, जिस कारण लाखों कर्मचारी बिना पदोन्नति के रिटायर हो चुके हैं।
Q2. ‘मध्य प्रदेश लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025’ को कैबिनेट की मंजूरी कब मिली?
उत्तर: राज्य सरकार ने 17 जून 2026 को आयोजित कैबिनेट बैठक में इस नए पदोन्नति नियम को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
Q3. नए नियमों के तहत क्लास-1 अधिकारियों का प्रमोशन कैसे होगा?
उत्तर: क्लास-1 अधिकारियों (जैसे डिप्टी कलेक्टर) के लिए प्रमोशन की लिस्ट केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि मेरिट (Merit) और सीनियरिटी (Seniority) दोनों के संयुक्त आधार पर बनाई जाएगी।
Q4. प्रमोशन के लिए ACR (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) की क्या शर्तें हैं?
उत्तर: नए फॉर्मूले के अनुसार, पिछले 2 साल में कम से कम 1 रिपोर्ट ‘आउटस्टैंडिंग’ होनी चाहिए, या पिछले 7 साल में कम से कम 4 रिपोर्ट ‘A+’ होनी चाहिए। यदि कर्मचारी की गलती से ACR नहीं बनी है, तो प्रमोशन रोक दिया जाएगा।
Q5. इस प्रमोशन प्रक्रिया से राज्य के युवाओं को क्या फायदा होगा?
उत्तर: लगभग 4.5 लाख कर्मचारियों के प्रमोट होकर ऊपरी पदों पर जाने से निचले स्तर (Entry-level) के करीब 2 लाख पद खाली हो जाएंगे। इन पदों पर राज्य सरकार नई भर्तियां निकालेगी, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा।
Q6. किन विभागों पर प्रमोशन न होने का सबसे बुरा असर पड़ा है?
उत्तर: जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE), लोक निर्माण (PWD), और नगरीय विकास जैसे विभागों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। यहाँ कई शीर्ष पद (जैसे EE और ENC) केवल ‘प्रभार’ (In-charge) व्यवस्था के जरिए चलाए जा रहे हैं।
Q7. SPEAK संगठन सरकार के इस फैसले का विरोध क्यों कर रहा है?
उत्तर: SPEAK (सामान्य पिछड़ा वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संगठन) के अध्यक्ष डॉ. केएस तोमर का आरोप है कि नए नियम 2002 के नियमों की तरह ही SC-ST वर्ग को अनुचित लाभ पहुंचा रहे हैं, जबकि अनारक्षित वर्ग के प्रमोशन लंबे समय से लंबित हैं। वे इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।